लालची प्याज वाला Greedy Onion Seller hindi stories

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बहुत समय पहले एक गाँव में अभिनय और अरविन्द नाम के दो दोस्त रहते थे. अभिनय बहुत लालची था और हमेशा सब कुछ उसी की इच्छा के अनुसार हो, ऐसा वह सोचता था. अरविन्द एक बहुत अच्छा इन्सान था. वह स्थितियों के अनुसार व्यव्हार करता था.

अभिनय और अरविन्द दोनों साथ में प्याज का व्यापर करते थे. जो प्याज वो बेचते थे उनको वो प्याज की खेती करने वाले किसान से कम पैसे देकर ज्यादा मात्रा में खरीद कर दाम बढ़ा कर बेचा करते थे.

एक दिन अभिनय और अरविन्द प्याज बेच रहे थे. एक आदमी प्याज खरीदने उनके दुकान आता है. वह कहता है -"1 किलो प्याज कितने का है बाबू?"

अरविन्द कहता है -"50 रुपये भाई साहब."

आदमी -"अरे! प्याज का दाम बढ़ गया है क्या?"

अरविन्द -"हाँ."

आदमी कहता है -"मैं 5 किलो प्याज खरीदूंगा. 40 रुपये लगा लो."

अरविन्द -"ठीक है ले लीजिये."

तभी अभिनय अरविन्द से कहता है -"ये क्या बात हुई अरविन्द. तुमने 40 रुपये में हाँ कह दिया. तुम कुछ नहीं जानते हो. मैं बात करता हूं रुको."

अभिनय कहता है -"भाई साहब! आप 10 किलो ले लेंगे. तब भी हम 40 रुपये के दाम में नहीं बेचेंगे. हमारा नुकसान होगा. अब आप की मर्जी."

अभिनय के कठोर तरीके से बात करने के कारण वह आदमी वहां से चला जाता है.

अरविन्द -"अरे अभिनय! हमारे पैसे तो हमें मिल रहे थे न. तो तुमने उस आदमी से ऐसे क्यों बात की."

अभिनय -"अगर एक आदमी को इतने दाम पे बेचते, तो एक के बाद के एक हमारे पास इसी दाम से खरीदने कई लोग आते जायेंगे. हमें ख़रीदे हुए दाम से ज्यादा दाम में बेचना होगा, वरना हमारा नुकसान होगा. कल देखना वो ही आदमी हमारे पास आएगा इसी दाम से खरीदने. तुम ज्यादा मत सोचो."

अभिनय की यह बातें सुनकर अरविन्द कुछ नहीं कहता है. और अगले दिन अभिनय की बात के अनुसार वो आदमी लौट के दुकान आता है प्याज खरीदने.

आदमी -"ठीक है! तुम्हारे ही दाम पे 5 किलो प्याज दे दो."

अभिनय उस आदमी को प्याज देकर पैसे लेता है. बाद में अभिनय कहता है -"देखा तुमने अरविन्द! अगर कल हमने 40 के दाम पे बेचा होता तो 50 रुपये का नुकसान होता.

अरविन्द -"अभिनय! हमेशा ऐसे जिद्दी होना अच्छी बात नहीं है. हमें परिस्थितियों के अनुसार चलना होगा. वर्ना बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा."

अभिनय -"ह..ह..! तुम्हारे कहे अनुसार करेंगे तो सिर्फ नुकसान मिलेगा."

अरविन्द अपने दोस्त के खिलाफ न जाने के इरादे से उसे कुछ नहीं कह पाता है. दुकान में कम प्याज होने के कारण अगले दिन दोनों प्याज खरीदने जाते हैं.

अभिनय -"अरविन्द! इस बार हमने प्याज कुछ ज्यादा दाम पर ख़रीदा है. इसलिए हमें इनको ज्यादा दाम पर बेचना होगा."

अरविन्द -"ठीक है अभिनय."

ऐसे ही दोनों प्याज को ध्यान से बेचने लगते हैं. प्याज को खरीदने के एक दिन बाद इनका दाम बहुत गिर जाता है. और ये बात अरविन्द को हर रोज की तरह अख़बार पढ़ने के कारण अभिनय से पहले पता चल जाता है.

अरविन्द तुरंत सोचता है -"मुझे यह बात तुरंत अभिनय को बतानी चाहिए. वरना वो सबको दाम बढ़ा के बताएगा और एक भी प्याज नहीं बिकेंगे."

वह तुरंत अभिनय के पास पहुँचता है और कहता है -"अभिनय...अभिनय.."

अभिनय -"क्या हुआ अरविन्द! क्यों इतना जोर से चिल्ला रहे हो?"

अरविन्द -"प्याज का दाम बहुत घट गया. अब तुम दुकान पर आये हुए लोगों को ज्यादा दाम बोल कर वापस मत भेजो. बाद में हमें ही पछताना पड़ेगा."

अभिनय -"क्या तुमने इसीलिए इतना जोर से चिल्लाया. इसमें कौन सी बड़ी बात है. कुछ दिनों में दाम वापस बढ़ जायेगा. इतना ही नहीं, हमें सबसे पहले किसानों के पास जाकर सारे प्याज खरीद लेने चाहिए, ताकि गाँव में किसी के पास बेचने के लिए प्याज ही न हो. दाम बढ़ने तक हम प्याज को छुपा लेंगे."

अरविन्द -"मगर अभिनय! अगर हम तब तक इंतजार ही करेंगे तो प्याज ख़राब हो जायेगा न. उसके बाद हम ही पछतायेंगे. और अब जैसे पैसे भी नहीं मिलेंगे."

अभिनय -"अरविन्द! तुम ऐसे क्यों सोचते हो. मेरे सोच के अनुसार करेंगे तो ज्यादा पैसे मिलेंगे. इस बार के लिए मेरी बात सुनो बस."

अरविन्द -"ठीक है अभिनय! तुम्हारी मर्जी."

अरविन्द अपने दोस्त के मनाने पर प्याज न बेच के ऐसे ही रखता है और इंतजार करता है कि कब दाम बढ़ेंगे. ऐसे बहुत दिनों के बाद अभिनय को पता चलता है कि प्याज के दाम बढ़ गए हैं. और दोनों प्याज बेचने निकलते हैं.

दुकान पर जाकर निधानी से प्याज नीचे लाके 1 किलो को 300 रुपये में बेचना शुरू करते हैं. गाँव में कहीं और प्याज न मिलने पर दाम का बढ़ना लोगों को आश्चर्यचकित कर देता है. लोगों को प्याज की जरुरत है और कोई चारा न होने पर वो 1 किलो के 300 रुपये देके खरीदते हैं. इसके कारण अभिनय और अरविन्द के व्यापर में बहुत लाभ होता है.

इससे अभिनय का लालच और अधिक हो जाता है. वो अरविन्द की बात बिलकुल नहीं सुनता है. अरविन्द की बातों को नजरंदाज करके गाँव के सारे प्याज को खरीद के दाम के बढ़ने का इंतजार करते हुए तब तक प्याज को छुपा के और उन्हें बहुत महंगे दाम पर बेचना अपनी आदत बना लेता है.

ऐसे समय में एक बार प्याज के दाम बढ़ने का इंतजार दिनों से महीनों में बदलना शुरू हो जाता है. प्याज को निधानी में रखे बहुत दिन हो जाते हैं. अरविन्द को दुकान में से बदबू आती है. जब वो जाकर निधानी जांचता है तो देखता है कि सारे प्याज सड़ जाते है.

अरविन्द तुरंत अभिनय को बुलाके उसे सड़ी हुई प्याज दिखाता है. नुकसान पाकर अभिनय को उसकी गलती का एहसास होता है. उसकी लालच और स्वार्थ के कारण नुकसान होना और अरविन्द की बात ना मानना उसे बहुत दुःख करता है.

अभिनय -"अरविन्द! यह सब मेरी लालच के कारण हुआ है. मुझे माफ़ कर दो."

अरविन्द -"हमेशा तुम्हारे ही इच्छा के अनुसार सब कुछ होना चाहिए, ऐसा व्यक्तित्व अच्छा नहीं है. कम से कम अब समझो कि परिस्थितियों के अनुसार चलना ही अच्छा है."

अभिनय -"हाँ अरविन्द! हमें पता नहीं कि कब हमारी स्थिति बदलेगी, इसीलिए उनके ही अनुसार चलना अच्छा है. अगर तुम्हारी बात सुनी होती तो आज हमारा नुकसान नहीं होता. मुझे लालची नहीं होना था. अब आगे ऐसा कभी नहीं होगा."

अरविन्द -"तुम्हे अपनी गलती का एहसास हो गया बस इतना काफी है. अब से हम ध्यान रखेंगे."

अभिनय -"ठीक है अरविन्द."

तब से दोनों बिना किसी लालच के अपना व्यापर चलाने लगते हैं.



सीख -"सब कुछ हमारी इच्छा के अनुसार चलने का जिद करना अच्छा नहीं है. परिस्थितियों के अनुसार अपना व्यव्हार बदलना चाहिए.


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लालची प्याज वाला Greedy Onion Seller hindi stories लालची प्याज वाला Greedy Onion Seller hindi stories Reviewed by hindi stories on December 21, 2019 Rating: 5

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