लालची चुड़ैल hindi stories for kids

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ये कहानी गाँव की लालची चुड़ैल की है जो गाँव में आकर लोगों को परेशान कर रही थी. वो हर रात निकलती और गाँव जाकर जानवर, इन्सान को पकड़ लेती और खा जाया करती थी.

आज भी वो गाँव के लिए निकलती है. गाँव वाले डर के मारे घर के अन्दर भागने लगते हैं और बचाओ बचाओ चिल्लाने लगते हैं. सभी गाँव वाले घर के अन्दर छुप जाते हैं. चुड़ैल को सामने एक बैल दिखता है. चुड़ैल उस बैल को उठाकर वहां से जाने लगती है और कहती है -"आज मैं इस बैल को खा जाउंगी ...ही ..ही ..ही .."

चुड़ैल उस बैल को लेकर वहां से उड़ जाती है और वापस अपने जंगल की गुफा में चल जाती है. गाँव वाले सुबह निकलते हैं और डरे हुए आपस में बात करते हैं -"वो चुड़ैल कितनी खतरनाक है. हमारी बैलो को लेकर जा रही है वो. हमें इस बात की खबर सरपंच जी को भी देनी चाहिये."

ये कहकर सभी गाँव वाले सरपंच के पास जाने लगते हैं. उन सबके साथ गाँव का सबसे समझदार आदमी रामू भी जाता है. गाँव वाले सरपंच जी से कहते हैं -"सरपंच जी .. हमारी मदद कीजिये .."

सरपंच -"क्या बात है..."

गाँव वाले -"हमारे गाँव में एक खतरनाक चुड़ैल आ गयी है.वो रोजाना हमारे जानवरों को पकड़ कर ले जा रही है. हमारा रात को निकलना मुश्किल हो गया है सरपंच जी."

सरपंच जी गाँव वालों की बात सुनकर बोलते हैं -"अरे भाई हम क्या कर सकते हैं. हम उस चुड़ैल का सामना नहीं कर सकते हैं. वो हमें पकड़ कर ले जाएगी, तब हम क्या करेंगे."

तभी सरपंच जी की बात सुनकर गाँव का होशियार रामू बोलता है -"सरपंच जी! हम इस प्रकार खाली हाथ कैसे बैठ सकते हैं. हमें उस चुड़ैल का सामना करना होगा. नहीं तो हम ऐसे ही अपनी जिंदगी डर डर के जियेंगे."

सरपंच बोलते हैं -"तुम ही बताओ, हम क्या करें ?"

उस पर रामू कहता है -"सरपंच जी! हमें उसका सामना करना पड़ेगा."

सरपंच -"ठीक है! आज रात हम सब मिलकर उस चुड़ैल का सामना करेंगे. रात में सब लोग इकठ्ठा रहना. हम उस चुड़ैल से प्यार से बात करेंगे."

इतनी बात करके सभी अपने अपने घर चले आते हैं. रात होती है, और चुड़ैल अपनी गुफा से बाहर आती है और फिर गाँव की तरफ आती है. चुड़ैल देखती है कि गाँव में कोई जानवर नहीं है और एक भी इन्सान दिख नहीं रहा. सरपंच जी और बाकि सब लोग एक घर में छुपे हुए थे.

चुड़ैल एक भी जानवर ना पाकर गुस्से से चिल्लाती है -"कहाँ हो सब लोग बहार आ जाओ, मुझे भोजन नहीं मिला तो मैं पुरे गाँव को जला दूंगी और सब को खा जाउंगी. जल्दी निकलो, नहीं तो तुम सभी मारे जाओगे. एक भी यहाँ जिन्दा नहीं बचेगा."

बेचारे सरपंच जी डरपोक थे. वो तुरंत बहार निकल आते हैं और गाँव की तरफ से बोलते हैं -"हमें माफ़ कर दीजिये चुड़ैल जी! हमारे गाँव को बक्श दीजिये और हमारे जानवरों को भी छोड़ दीजिये."

इस पर चुड़ैल हँसते हुए बोलती है -"हा.. हा.. हा! ठीक है, मैं तुम सब को छोड़ दूंगी. लेकिन एक शर्त है."

सरपंच जी बिना सोचे समझे बोल पड़ते हैं -"जी हमें आपकी सभी शर्तें मंजूर हैं."

लेकिन इस पर रामू बोलता है -"सरपंच जी, पहले सुन तो लीजिये! ये चुड़ैल क्या कह रही है."

तब सरपंच जी रामू को देखते हुए बोलते हैं -"तुम चुप रहो. चुड़ैल जी आप बोलिए."

चुड़ैल बोलती है -"मुझे तुम रोजाना जानवर लाकर दोगे. तब मैं तुम्हारे गाँव नहीं आउंगी और अपनी गुफा में आराम से रहूंगी."

सरपंच जी बिना कुछ सोचे ही हाँ में हां मिला देते हैं -"हाँ ... हमें मंजूर है चुड़ैल जी. आप जो भी कहेंगी हमें सब मंजूर है."

तब इस पर चुड़ैल कहती है -"ठीक है! आज मैं जा रही हूं. कल से रात में मेरा भोजन पहुँच जाना चाहिए. अगर मेरा भोजन नहीं पहुंचा, तो मैं सारे लोगों को खा जाउंगी."

इतना बोलती हुई चुड़ैल हवा में उडती हुई चली जाती है. तभी रामू सरपंच जी से बोलता है -"अरे सरपंच जी ... ऐसे तो हमारे सारे जानवर ख़त्म हो जायेंगे. फिर हम क्या करेंगे."

फिर सरपंच जी बोलते हैं -"अरे भई! तब की तब सोचेंगे."

रामू कहता है -"सरपंच जी! हमें कोई दूसरा उपाय ढूँढना होगा. ऐसे तो हमारा ही नुकसान होगा."

सरपंच जी रामू की बात पर गुस्सा हो जाते हैं और गुस्से से बोलते हैं -"तुम हमें मत सिखाओ. अगर तुम इतने होशियार हो, तो तुम ही उस चुड़ैल का सामना कर के दिखाओ. अगर तुमने उसे हरा दिया तो मैं तुम्हे सरपंच बना दूंगा और मैं इस पद से हट जाऊंगा."

गाँव वाले भी सरपंच की तरफ बोलते हुए कहते हैं -"बताओ रामू! तुम कर पाओगे सामना."

तभी बेचारा रामू दुविधा में फंस जाता है और ना चाहते हुए भी सभी की हाँ में हाँ मिला देता है और कहता है -"ठीक है! मैं चुड़ैल का सामना करूँगा."

तब सरपंच जी कहते हैं -"क्या करोगे तुम?"

रामू कहता है -"वो मैं कल ही आप सब को बताऊंगा."

रामू वहां से अपने घर चला जाता है. रात भर वह सोचता रहता है कि वह चुड़ैल का सामना कैसे करे. रामू अपने मन में विचार करता है -"मैं कैसे उस चुड़ैल का सामना करूँ? उस चुड़ैल से गाँव वालों को कैसे बचाऊं? कुछ तो करना होगा मुझे."

रामू रात भर सोचता रहता है और अगले दिन गाँव वाले उसका मजाक उड़ाते हुए उससे पूछने लगते हैं -"अरे भाई रामू! क्या हुआ.. रामू आज चुड़ैल को हरा दोगे न तुम?"

एक दूसरा गाँव वाला बोलता है -"रामू लगता है चुड़ैल से डर गया है."

सभी रामू पर हँसते है, पर रामू कुछ नहीं कहता. रात होती है और रामू चुड़ैल के लिए भोजन की जगह एक मुर्गी का बच्चा हाथ में लेकर गाँव से निकाल पड़ता है.

गाँव वाले रामू के हाथ में मुर्गी का बच्चा देखकर चौंक जाते हैं और हैरानी से पूछते हैं -"अरे इस छोटी मुर्गी के बच्चे से क्या होगा..उस चुड़ैल को बड़ा जानवर चाहिए. इसे देखकर कहीं वो गुस्सा न हो जाये और तुम्हे ही न खा जाए."

रामू उन सबको कुछ नहीं कहता और जंगल के रास्ते से होते हुए चुड़ैल की गुफा के पास जा पहुँचता है. वो अन्दर जाता है और देखता है कि चुड़ैल सो रही थी. रामू डरता डरता आगे बढ़ता है बोलता है -"चुड़ैल रानी..चुड़ैल रानी .."

चुड़ैल जाग जाती है और उसके हाथ में छोटे से मुर्गी के बच्चे को देखकर बोलती है -"ये क्या लाये हो! इससे मेरा पेट नहीं भरेगा. आज मैं तुम्हे ही खा जाउंगी."

रामू अपनी बुद्धि इस्तेमाल करते हुए बोलता है -"चुड़ैल रानी! मेरे पास बस यही एक छोटी मुर्गी थी, इसके अलावा मेरे पास और कोई जानवर नहीं है."

इस पर चुड़ैल गुस्सा करते हुए बोलती है -"इससे मेरा कुछ नहीं होगा. मुझे ढेर सारा भोजन चाहिए."

तब रामू कहता है -"अच्छा .. तो मेरे पास एक उपाय है. गाँव के बगल में एक बड़े से जानवर का घर है. जहाँ गाँव वालों ने सभी जानवरों को छुपा रखे हैं.आप वहां चलो, आपको वहां तरह तरह के स्वादिष्ट वाले भोजन मिलेंगे."

यह सुन चुड़ैल खुश हो जाती है और कहती है -"क्या सच में ..."

रामू -"हाँ ...हाँ .. सच में चुड़ैल रानी ...सच में .."

चुड़ैल लालच में आ जाती है और रामू के साथ जाने के लिए तैयार हो जाती है. रामू जंगल से होता हुआ चुड़ैल को एक कुत्ते से भरे हुए घर के सामने ले आता है. जिसमें ढेर सारे जंगली कुत्ते रखे गए थे. सभी कुत्ते शांत सो रहे थे.

रामू चुड़ैल को अपने जाल में फांसते हुए बोलता है -"चुड़ैल रानी! वो देखो घर. उसी में ढेर सारे जानवर हैं. तुम धीरे से जाना, नहीं तो सारे जानवर भागने लगेंगे."

चुड़ैल -"ठीक है ... मैं धीमे धीमे से ही जाउंगी."

चुड़ैल घर के अन्दर जाने लगती है. चुड़ैल जैसे ही घर के अन्दर घुसती है, रामू तेजी से दौड़कर दरवाजा बाहर से बंद कर देता है.

रामू कहता है -"अब चुड़ैल रानी गयी. कुत्ते तुम्हे नहीं छोड़ेंगे."

अन्दर सोये हुए कुत्ते जाग जाते हैं और चुड़ैल को काटने लगते हैं. चुड़ैल भागने की कोशिश करती है, पर भाग नहीं पाती. कुत्ते चुडैल को मार डालते हैं.

रामू हँसते हुए गाँव जाता है और गाँव वालों को पूरी बात बताता है. गाँव वाले रामू की बहादुरी देखकर खुश हो जाते हैं और कहते हैं -"भाई रामू! सच में बहुत बहादुर हो तुम.तुमने सब की जान बचा ली."

इस पर सरपंच जी कहते हैं -"रामू तुम सच में असली सरपंच बनने के लायक हो. आज से पुरे गाँव को तुम ही संभालोगे."

रामू गाँव का सरपंच बन जाता है और अच्छे से सबकी देखभाल करता है.

सीख -"लालच बुरी बला है."



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लालची चुड़ैल hindi stories for kids लालची चुड़ैल hindi stories for kids Reviewed by hindi stories on November 29, 2019 Rating: 5

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