घमंडी जादूगर की कहानी (Hindi Kahaniya)

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एक बार महाराज कृष्णदेव की पत्नी किसी बात से बहुत दुखी थीं. रानी को दुखी देखकर महाराज भी काफी दुखी थे. महाराज ने रानी को खुश करने के लिए अपने दरबारियों से उपाय पूछा. तभी दरबार में बैठे एक दरबारी ने कहा -"महाराज! मैंने जादूगर राका के बारे में बहुत सुना है. उसकी कई राज्यों में खूब चर्चा है. वो अपने जादू से लोगों का अच्छा मनोरंजन करता है. आप उसे बुलाइए, वो जरुर महारानी को खुश कर देगा."

महाराज बोले -"ठीक है! उस जादूगर को कल दरबार में पेश किया जाये."

अगले दिन वो जादूगर अपनी जादू की पोटली और एक नटखट तोते के साथ दरबार में आता है और कहता है -"महाराज की जय हो!"

महाराज कहते हैं -"राका! हमने तुम्हारी खूब तारीफ़ सुनी है. अगर तुमने हमारी रानी को खुश कर दिया, तो हम खूब सारा इनाम देकर तुम्हे खुश कर देंगे."

जादूगर को अपने जादू पर बहुत घमंड था. उसने कहा -"आप चिंता न करें महाराज! मेरे जैसा जादूगर इस दुनिया में कोई भी नहीं है. ऐसा कोई करतब नहीं है, जो मैं नहीं कर सकता. मैं जरुर महारानी को खुश कर दूंगा.

ये कहकर जादूगर अपने करतब दिखाना शुरू करता है. जादूगर के कई करतब दिखाने के बाद भी महारानी के चेहरे पर ख़ुशी नहीं आती. जिससे महाराज को जादूगर पर गुस्सा आ जाता है और वो कहते हैं-"बस करो! तुम्हारे ऐसे करतब किस काम के, जो तुम रानी को खुश तक न कर सके. और तुम खुद को दुनिया का सबसे बड़ा जादूगर कहते हो. इसके लिए हम तुम्हें दंड देंगे."

राजा का गुस्सा देख जादूगर घबरा जाता है और कहता है -"क्षमा करें महाराज! लेकिन आज तक ऐसा कोई करतब नहीं है, जो मैं नहीं कर सकता. मैंने अपने सारे करतब महारानी के लिए महारानी के सामने दिखा दिए. फिर भी रानी खुश नहीं हुई. मैं सबसे बड़ा जादूगर हूं, इसे साबित करने का मुझे एक मौका और दीजिये."

महाराज बोले -"ठीक है! लेकिन अगर तुम ये साबित नहीं कर पाए, तो तुम्हें इसकी कड़ी सजा मिलेगी."

जादूगर -"जी महाराज. लेकिन अगर मैंने साबित कर दिया, तो मैं रानी के सबसे कीमती कंगन इनाम में लूँगा."

महाराज जादूगर की ये शर्त मान लेते हैं. जादूगर अपने जादू का घमंड दिखाते हुए महाराज से कहता है -"महाराज! अगर आपके राज्य या दरबार में से किसी ने भी मुझे जादू की प्रतियोगिता में हरा दिया, तो मैं उसे सबसे बड़ा जादूगर मान लूँगा. और मैं जादू करना छोड़ दूंगा. लेकिन, अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मुझसे दी जाने वाली कठोर सजा मुझसे हारने वाले को दी जाएगी."

सजा की बात सुनते ही कोई भी दरबारी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए तैयार नहीं हुआ. तभी महाराज ने तेनालीराम की तरफ देखकर कहा -"तेनालीराम! क्या इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहोगे?"

यह सुनकर तेनालीराम बोले -"जैसी आपकी आज्ञा महाराज. मुझे कल तक का समय चाहिए."

महाराज इसके लिए तैयार हो जाते हैं और अगले दिन प्रतियोगिता का ऐलान कर देते हैं. तेनालीराम अपने घर पहुंचकर, प्रतियोगिता में जितने का उपाय सोचने लगते हैं. तभी उनकी नजर बाहर रेत से खेल रहे छोटे बच्चों पर पड़ती है. और वो जीत की योजना बनाते हैं."

अगले दिन तेनालीराम दरबार पहुँचते हैं और प्रतियोगिता शुरू होती है. तेनालीराम जादूगर से कहते हैं -"मैं अपनी आँख बंद करके एक जादू करूँगा. वही जादू तुम्हें अपनी आँखें खोल कर करना होगा. क्या तुम्हें मंजूर है?"

जादूगर बोला -"इसमें कौन सी बड़ी बात है. मुझे मंजूर है."

तेनाली अपनी पोटली में से दो मुट्ठी नमक लेते हैं और अपनी बंद आँखों के ऊपर डालने लगते हैं. ये देख जादूगर की आँखें डर के मारे फटी रह जाती हैं. तेनालीराम की ये चतुराई देख दरबार में सभी हैरान रह जाते हैं.

अब बारी जादूगर की थी. ये करतब देख जादूगर एकदम डर जाता है. खुली आँखों में नमक डाला, तो वह अँधा हो जायेगा. वो जादूगर अपनी हार मानते हुए महाराज के सामने अपनी जान की भीख मांगने लगता है. जादूगर को घबराया देख रानी जोर जोर से हंसने लगती हैं. ये देख महाराज भी खुश हो जाते हैं.

महाराज लालची जादूगर को उसकी घमंड की सजा देते हैं और तेनालीराम को उनकी समझदारी के लिए उसे खूब सारा इनाम.


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घमंडी जादूगर की कहानी (Hindi Kahaniya) घमंडी जादूगर की कहानी (Hindi Kahaniya) Reviewed by hindi stories on November 20, 2019 Rating: 5

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