मूंछों वाली लड़की I Kids Moral Stories In Hindi

                 मूंछो वाली लड़की Moral Stories In Hindi

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यह कहानी है लीला की जो सेठ लालचंद की एकलौती बेटी थी. सेठ लालचंद बहुत अमीर थे. उनके पास बहुत सारी जमीन, खेत खलिहान और बंगले थे. सेठ लालचंद अपनी बेटी को बहुत प्यार करते थे. इसीलिए वह उसकी हर इच्छा पूरी करते. यहाँ तक कि वह उसकी बेफिजूल की मांग भी पूरी करते थे.

सेठ लालचंद के इतने लाड़ प्यार से लीला काफी बिगड़ चुकी थी. वह किसी की भी बेइज्जती कर देती थी. एक दिन की बात है, लीला और उसकी सहेलियां रमा और जाया नदी किनारे लंगड़ी खेल रही थी. तभी लीला का ध्यान पास एक आम के पेड़ पर गया. लीला भागती हुई उस पेड़ के पास गयी.

तीनों सहेलियां उस पेड़ पर लगे आम पर निशाना लगाने लगीं. सभी ने कुछ आम तोड़ लिए. रमा और जया वहीँ आम खाने लगीं. लेकिन लीला और अधिक आम तोड़ने लगी.

रमा ने कहा - "अरे लीला! बहुत हो गया , अब रहने भी दो."

लीला - "नहीं ! मैं सारे आम तोड़ कर रहूंगी."

जया - "सारी आम की क्या जरुरत है. हम तो सिर्फ तीन ही हैं न, इतनी बहुत है."

लीला ने अपनी सहेलियों की नहीं सुनी और वह आम तोड़ती रही. और फिर जादू हुआ, और वह आम का पेड़ बोलने लगा.

आम का पेड़ -"रुक जाओ लीला!"

लीला की दोनों सहेलियां घबरा गयीं और डर से कांपने लगीं.

लीला - "तुम कैसे बोल सकते हो"

आम का पेड़ -"वो जरुरी नहीं है! तुम इतने सारे आम क्यों तोड़ रही हो?"

लीला -"अपने लिए."

आम का पेड़ -"क्यों, तुम इतनी सारी आम खाओगी ?"

लीला -"नहीं ! लेकिन मैं सब की सब तोड़ के ही रहूंगी."

आम का पेड़ -"क्यों ?"

लीला -"क्योंकि मैं लीला हूं और मुझे जो चाहिए वो मैं हासिल कर ही लेती हूं."

आम का पेड़ -"इतनी सी उम्र में इतना घमंड अच्छा नहीं लीला."

लीला -"घमंड क्यों न करूँ! मेरे पापा सेठ लालचंद हैं. इस गाँव के सबसे अमीर इंसान."

आम का पेड़ -"तुम ऐसे नहीं समझोगी, तुम्हे सबक सिखाना ही पड़ेगा."

इतना कहकर आम के पेड़ ने जादू किया और लीला की मूंछे आ गयी. जब लीला अपनी सहेलियों की ओर घूमी तो उसकी सहेलियों ने कहा -"लीला तेरी मूंछे हैं."

लीला ने हैरान होकर अपनी मूंछो को हाथ लगाया और चिल्लाने लगी -"अरे ! अरे ! हाय मुझे माफ़ कर दो. कृपया मुझे माफ़ कर दो"

आम का पेड़ -"अब क्या हुआ! तुम तो सेठ लालचंद की बेटी हो न. तो फिर इस तरह भीख क्यों मांग रही हो."

लीला -"मेरी भूल हो गयी, मुझे माफ़ कर दो."

आम का पेड़ -"नहीं ! हरगिज नहीं. अब जाओ अपने पिताजी को बुला लाओ. तभी तुम्हे माफ़ी मिलेगी और इन मूंछो से आजादी."

लीला ने अपना मुंह दुपट्टे से ढंका और अपने गाँव की ओर सहेलियों के साथ चल पड़ी. रास्ते में हवा से उसका दुपट्टा उड़ गया और गाँव वाले लीला की मूंछे देखकर हंसने लगे.

गाँव वाले -"अरे ये क्या! मूंछों वाली लड़की.."

गाँव वालों की बात सुनकर लीला को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और वो भागते हुए अपने घर गयी. वहां उसने अपने पिताजी को सारी बात बताई. फिर सेठ लालचंद उसके साथ निकल पड़े.

सेठ लालचंद उस पेड़ के पास पहुंचे और भींख मांगने लगे -"आप मेरी बेटी को माफ़ कर दीजिये, वो नासमझ है."

आम का पेड़ -"नासमझ नहीं, वो घमंडी है. और उसके घमंड का कारण तुम हो. अगर तुम इसे सही परवरिश देते, तो इसे दूसरों के प्रति सहनशीलता होती. लीला, कैसा लगा मजाक का कारण बनकर. इतनी सी उम्र में तुम्हे इतना सारा घमंड है."

लीला -"मुझे माफ़ कर दीजिये, मैं कभी पैसों का घमंड नहीं करुँगी. कृपया मुझे माफ़ कर दीजिये."

इतना कहकर लीला रोने लगी.

दोनों बाप बेटी को अपने किये पर पछतावा था. यह देखकर जादुई पेड़ को उन पर दया आ गयी. उसने वापस लीला को ठीक कर दिया.

फिर पेड़ ने लीला को सीख देते हुए कहा -"घमंड अच्छे अच्छों को ले डूबता है, तुम तो अभी बच्ची हो. घमंड से दूर रहो."



                   लालची दूधवाला Hindi Stories

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नंदिपुर गाँव में बजरंग नाम का एक दूधवाला था. बजरंग बहुत ही घमंडी था. बजरंग की इतनी ऐठ थी कि नंदिपुर में वह अकेला दूधवाला था. नंदिपुर से दुसरे गाँव जाने के लिए नाव से नदी पार करनी पड़ती थी. इसीलिए कोई भी दूधवाला नंदिपुर दूध बेचने नहीं आता था और बजरंग नंदिपुर में ही रहता था. और वहीँ उसका तबेला भी था.

गाँव के मुखिया के पास अक्सर गाँव वालों की शिकायत आती थी -"मुखिया जी, बजरंग ने फिर से दूध का दम बढ़ा दिया है और आजकल उसका दूध पानी की तरह पतला हो गया है. अब आप ही कुछ कीजिये."

मुखिया जी सोच में पड़ गए और कुछ देर बाद उन्हें कुछ सुझा. और वो भिको को लेकर नदी के पार चले गए. मुखिया जी सीधे मंडी पहुंचे.

मुखिया भीकू से -"भीकू! यहाँ अच्छी अच्छी गायें हैं. चलो इनका दाम पता करते हैं."

भीकू -"ठीक है."

मुखिया ने एक दुकानदार से पूछा -"अरे भाई! ये काली वाली गाय कितने की है?"

दुकानदार -"सिर्फ 1000 रुपये की है."

मुखिया -"और ये सफ़ेद वाली ?"

दुकानदार -"वो भी 1000 रुपये की है."

मुखिया -"ये गाय कितना लीटर दूध देती है ?"

दुकानदार -"दिनभर में 30 लीटर."

फिर, मुखिया ने भीकू से कहा -"भीकू! बजरंग के पास कितनी गाय है ?"

भीकू -"3 गाय है मालिक."

मुखिया -"मतलब उसे 1 दिन में 90 लीटर दूध मिलता है. और हमारे गाँव में कितने परिवार हैं ?"

भीकू -"कुल मिलाकर कुछ 200 परिवार."

फिर, मुखिया ने दुकानदार से कहा -"भाई! हम पांच गाय लेंगे. हमें क्या दाम पड़ेगा बताओ?"

दुकानदार -"आप एक साथ 5 गाय लेंगे, इसीलिए मैं आपको 5 गाय 4,000 रुपये में दे दूंगा."

मुखिया -"ठीक है! मैं कल पांचो गाय लेने आऊंगा."

दुकानदार -"ठीक है साहेब."

फिर मुखिया अपने गाँव लौटे और उन्होंने अपने गाँव का जमाकोश देखा. उसमें 10,000 रुपये थे."

मुखिया -"अगर हम वो 5 गाय खरीद लें, तो इसमें गाँव वालों का ही भला होगा. और मिले हुए उन दूध के पैसों से हम उन गाय की देख रेख भी कर लेंगे. और गाँव में किसी न किसी को नया रोजगार भी मिल जायेगा. ये अच्छा विचार है."

शाम के समय मुखिया ने गाँव में ऐलान किया -"कल गाँव में एक समारोह है. मैं चाहता हूं कि सभी के सभी उसमें उपस्थित रहें."

गाँव वाले -"पर कैसा समारोह?"

मुखिया -"वो मैं कल बताऊंगा."

मुखिया जी ने गाँव में एक तबेला बनवाया. इसके बाद मुखिया जी मंडी पहुंचे. वहां उसने व्यापारी को 4,000 रुपये दिए और 5 गाय खरीद लिए. उन पांचो गायों को उन्होंने तबेले में रखा. और उनके निकले हुए दूध से लस्सी बनवाई और दूध के पेड़े भी.

शाम को जब सब लोग उपस्थित हुए, तो मुखिया जी ने सब में पेड़े बंटवाये.

मुखिया -"आप सब लोग सोच रहे होंगे, कि यह किस चीज का समारोह है?"

गाँव वाले -"हाँ मुखिया जी, बताइए."

मुखिया -"थोडा सब्र कर लो, अच्छा बजरंग! मैं सोच रहा था कि तुम्हारी गाय कितने लीटर दूध देती है पुरे दिन में."

बजरंग -"अ ..अ! कुल मिलकर 90 लीटर दूध देती है मुखिया जी."

मुखिया -"तो क्या सारा दूध ख़त्म हो जाता है?"

बजरंग -"भगवान की कृपा से सारा दूध ख़त्म हो जाता है. 30 लीटर हलवाई ले जाता है, 10 लीटर स्कूल चला जाता है, 5 लीटर वकील जी और हां 5 लीटर आपके घर और बाकी जो बचता है वो यहाँ वहां छुट्टे में बिक जाता है."

मुखिया -"मतलब, तुम 50 लीटर ऐसे ही बेच देते हो. और बचे 40 लीटर में पुरे गाँव वाले के परिवार में दूध देते हो. भाई, ये गणित मुझे कुछ समझ नहीं आई. इसलिए शायद तुम्हारा दूध इतना पतला है. तुम आधा पानी मिलते हो."

बजरंग का भांडा फूट गया. गाँव वालों का बढ़ता आक्रोश देखकर बजरंग वहां से भाग गया.

गाँव वाले मुखिया से -"लेकिन अब हमें दूध कौन देगा?"

मुखिया -"मैंने इसका भी इंतजाम कर लिया है. अब से हमारे गाँव का खुद का तबेला होगा. हमने गाँव वालों के लिए 5 गाय खरीदी हैं जो रोज 150 लीटर दूध देंगी. इन गायों की देखभाल के लिए हम दो लोगों को रोजगार भी देंगे. और गाँव वालों को दूध सिर्फ 10 रुपये लीटर के दाम से मिलेगा."

गाँव वाले खुश होकर बोले -"अरे वाह! ये तो बहुत बढ़िया है."

दूध का दाम सुनकर गाँव वाले बहुत खुश थे. इस तरह समझदारी से मुखिया जी ने समस्या का समाधान भी कर दिया और गाँव वालों के लिए नया रोजगार भी बना दिया. और लालची दूधवाले बजरंग को सबक भी सिखाया.

इसीलिए कहते हैं कि समस्या का हल समझदारी से ही करना चाहिए.
मूंछों वाली लड़की I Kids Moral Stories In Hindi मूंछों वाली लड़की I Kids Moral Stories In Hindi Reviewed by hindi stories on November 14, 2019 Rating: 5

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