बहू कुल्फी वाली Hindi Kahaniya

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bahu kulfi wali
ये कहानी है जीवन के परिवार की. जीवन पर जान छिडकने वाली माँ गायत्री, पत्नी मीना और बेटी ख़ुशी. इनका परिवार बहुत खुश था, क्योंकि गायत्री और मीना कुल्फी बनाया करती थीं और जीवन इन्हें बेचा करता था. जीवन दिन भर घूम घूम कर सारी कुल्फियां बेच दिया करता था.

एक दिन की बात है, जीवन ख़ुशी को बाजार घूमा रहा था. ख़ुशी ने चूड़ियाँ लेने की इच्छा जाहिर की. जीवन और ख़ुशी चूड़ी की दुकान की तरफ जा ही रहे थे, कि तभी एक गुस्सैल बैल उन दोनों की ओर दौड़ने लगा. सारे बाजार में अफरा तफरी मच गयी. 

जीवन ने बैल को देख लिया और ख़ुशी को दूसरी तरफ धकेल दिया. बैल ने जीवन को अपने पैरों तले रौंद दिया. जीवन को अस्पताल ले जाया गया. वहां उसका सारा परिवार आंसू बहा रहा था. डॉक्टर ने कहा -"मुझे नहीं लगता, कि ये कभी अपने पैरों पर चल पाएंगे."

डॉक्टर की बात सुनकर जीवन का परिवार और भी ज्यादा टूट गया. एक महीने बाद जीवन घर आया. जीवन बहुत सोच में पड़ गया -"अब घर खर्च का क्या होगा? मुझे कोई न कोई काम ढूँढना होगा."

पत्नी मीना कहने लगी -"अब आप कैसे काम करेंगे."

जीवन -"कोई न कोई काम जरुर कर लूँगा."

इतने में माँ बोली -"मैं सोच रही थी, कि अगर किसी को काम करना ही है तो मैं करती हूं."

माँ की यह बातें सुनकर जीवन बोला -"नहीं नहीं माँ! मेरे रहते हुए आप काम करें."

मीना बोली -"सासू माँ, आपकी भी तबियत ठीक नहीं है. इस घर में मैं ही हूं जो एकदम तंदरुस्त है. तो काम मुझे करना चाहिए."

जीवन -"लेकिन तुम क्या करोगी ?"

मीना -"वही जो आप करते थे."

जीवन -"अरे कुल्फी की टोकरी लेके सर पे घूमना इतना आसान काम नहीं है. और तुम तो एक औरत हो."

मीना -"मुझे पता है यह आसान नहीं है. लेकिन मेरे पास और कोई रास्ता नहीं है. शुरुआत में मैं कम कुल्फियां लेकर जाउंगी."

जीवन -"ठीक है! अब सब भगवान के हाथ में है."

गायत्री और मीना ने एक बार फिर कुल्फियां बनाई. इस बार जीवन ने कुल्फी की टोकरी में हमेशा से आधी टोकरी भरी. मीना वह टोकरी लेकर बेचने निकल पड़ी. मीना ने दिनभर कुल्फियां बेचीं. शाम तक उसके पैरों में काफी दर्द होने लगा था. मीना चलते चलते अपने घर पहुंची. 

मीना ने आज दिन भर की कमाई अपने सास को दी. गायत्री ने वो पैसे भगवान के पास रखे. जीवन ने मीना को अपने पास बैठाया. मीना जीवन के पास बैठ गयी और जीवन ने उसके पैर अपने गोद में रख लिए और उन्हें दबाने लगा. 

मीना बोली -"अरे अरे ! ये आप क्या कर रहे हैं."

जीवन बोला -"पूरा दिन घूम कर पैर दर्द कर रहा होगा. उन्हें दबा रहा हूं."

मीना -"लेकिन आप ऐसा मत करिए. मुझे पाप लगेगा."

जीवन -"चुप! एकदम चुप."

जीवन ने मीना की एक न मानी और उसके पैर दबाता रहा. गायत्री यह देख बहुत खुश थी. गायत्री मन में सोचने लगी -"भगवान जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद, जो आपने मुझे ऐसे बहू बेटे दिए. जो मुसीबत के समय एक दुसरे का हाथ थामे रहते हैं."

फिर रोज मीना ने कुल्फियां बेचने का सिलसिला जारी रखा. और गायत्री घर सँभालने लगी. इस तरह जीवन के साथ इतना बड़ा हादसा होने के बाद उसके परिवार ने उसका साथ दिया. और उसकी जिंदगी बदतर होने से बच गयी.
सीख -"बुरे समय पर अपने ही काम आते हैं."

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बहू कुल्फी वाली Hindi Kahaniya बहू कुल्फी वाली Hindi Kahaniya Reviewed by hindi stories on November 23, 2019 Rating: 5

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