बीरबल कैसे बना नवरत्न I Akbar Birbal Story In Hindi

आपने अपने बचपन से लेकर अब अक अकबर बीरबल की कहानियाँ तो सुनी ही होंगी. लेकिन क्या आपको पता है कि बीरबल अकबर से कैसे मिले थे और उन्हें अकबर के दरबार में नवरत्न में कैसे शामिल किया गया था. आज आपको Akbar Birbal Story In Hindi में पता चलेगा कि यह कैसे हुआ था. चलिए कहानी शुरू करते हैं.

  बीरबल कैसे बना नवरत्न Akbar Birbal Story In Hindi

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एक समय की बात है, बादशाह अकबर अपने मंत्रियों की टोली के साथ शिकार पर निकले थे. काफी दिन बीत चुके थे, लेकिन उन्हें अब तक कोई शिकार नहीं मिला था. अकबर काफी परेशान हो चुके थे. उन्होंने अपने एक मंत्री शेरखान से गुस्से से कहा -"शेरखान! तुमने तो कहा था, कि जंगल शिकार से भरा पड़ा है. लेकिन ऐसा लगता तो नहीं है.

शेरखान डर गया और बोला -"म..मैं .. माफ़ी चाहता हूं बादशाह.. लेकिन पिछली बार .."

अकबर ने बीच में कहा -"मैं अपने महल वापस जाना चाहता हूं.. इसी वक़्त. मैं तुमसे आगरा में बात करूँगा."

नाराज बादशाह अकबर आगरा जाने के लिए निकल पड़े. पर जल्द ही उन्हें पता चला कि वो रास्ता भटक चुके हैं. बादशाह अकबर काफी परेशान हो चुके थे.

इसी दौरान बादशाह अकबर ने देखा, कि एक युवक उसी रास्ते से गुजर रहा था. उन्होंने उस युवक को रुकने के लिए कहा और बोले -"क्या तुम बता सकते हो, कि इनमें से कौन सा रास्ता आगरा की तरफ जाता है?"

युवक ने उत्तर दिया -"श्रीमान! इनमें से कोई भी रास्ता आगरा नहीं जाता."

अकबर -"तुम कहना क्या चाहते हो?"

युवक -"लोग जाते हैं, रास्ते नहीं."

यह सुनकर सभी हंस पड़े. फिर अकबर ने कहा -"हाँ! तुमने सही कहा. बताओ तुम्हारा नाम क्या है?"

युवक बोला -"मेरा नाम महेश दास है श्रीमान. अब आप मुझे अपने बारे में बताइए. आप कौन हैं और आपका नाम क्या है?"

अकबर बोले -"तुम बादशाह अकबर से बात कर रहे हो. पुरे हिंदुस्तान का बादशाह. मेरे दरबार में मुझे तुम जैसे निडर और हंसमुख लोगों की ही जरुरत है.अगर तुम मेरी शाही दरबार में शामिल होना चाहते हो, तो इस अंगूठी को लेकर मेरे पास आना. मैं तुम्हें तुरंत पहचान लुंगा."

इतना कहकर बादशाह अकबर ने अपने हाथ की अंगूठी निकालकर उस युवक को दे दी और आगे कहा -"खैर! अब हमें आगरा जाने का रास्ता बताओ. हम सभी बहुत थके हुए हैं. सूरज छिपने से पहले हमें आगरा पहुंचना है."

युवक ने उन्हें आगरा जाने का सही रास्ता बताया और बादशाह अकबर अपने लोगों के साथ वहां से चल दिए.

कई वर्षों बाद जब महेश दास जंगल के उसी रास्ते से गुजर रहे थे, उन्हें बादशाह अकबर की बातें याद आयीं. और महेश दास, बादशाह अकबर के किले की ओर चल पड़े.

महेश दास बादशाह अकबर के किले में पहुंचे और उन्होंने सिपाही से कहा -"मैं बादशाह से मिलना चाहता हूं."

सिपाही ने उन्हें रोकते हुए कहा -"रुको! पहले मुझे अन्दर पूछने दो."

सिपाही अनुमति लेने दरबार में गया. और फिर लौटा. उसने महेश दास से कहा -"अब तुम अन्दर जा सकते हो."

महेश दास पहली बार बादशाह अकबर के दरबार में आये थे. उन्होंने दरबार में जाकर अकबर को सलाम किया. बादशाह अकबर बोले -"तुम्हारा नाम क्या है? क्या हम एक दुसरे को जानते हैं?"

महेश दास बोले -"मेरे बादशाह! मेरा नाम महेश दास है."

अकबर -"मैंने ये नाम सुना तो है. लेकिन कुछ याद नहीं आ रहा."

महेश दास ने बादशाह को उन्ही की दी हुई अंगूठी दिखाई."

अंगूठी देखते ही बादशाह बोले-"हाँ महेश! मैं तुम्हें पहचान गया. मुझे तुम्हारा मजाक बहुत अच्छा लगा था. लेकिन मैं तुम्हारा इम्तहान लेना चाहूँगा. ये जांचने के लिए, कि क्या तुम वही आदमी हो, या फिर कोई और. मेरे दरबार के 5 दरबारी तुमसे एक एक सवाल पूछेंगे. देखते हैं कि तुम उन्हें क्या जवाब देते हो."

बादशाह का ये फरमान सुनकर उनके मंत्रियों ने सवाल पूछने शुरू किये. 

पहला सवाल -"ऐसे पड़ोसियों के बारे में बताओ, जो एक दुसरे को देख नहीं सकते?"

महेश दास -"आँखें! हमारी आँखें मेरी दोस्त."

दूसरा सवाल -"एक ऐसे दुश्मन का नाम बताओ, जिसे हराया नहीं जा सकता ?"

महेश दास -"मौत, मृत्यु."

तीसरा सवाल -"ऐसा क्या है, जो मौत के बाद भी जिन्दा रहता है?"

महेश दास -"गर्व, महिमा."

चौथा सवाल एक रेखा थी. मंत्री ने एक रेखा खिंची और कहा -"इस रेखा को बिना छुए, छोटा करके दिखाओ?"

महेश दास ने उसी रेखा के सामने बड़ी रेखा खिंची और कहा -"लीजिये, अब ये छोटी हो गयी है."

पांचवा सवाल -"कुछ ऐसा बताओ, जिसे न ही चाँद देख सकता है, और न ही सूरज."

महेश दास -"अंधकार, अँधेरा."

यह सब सुनने के बाद बादशाह अकबर बोले -"अब मेरी बारी है तुमसे सवाल पूछने की."

बादशाह ने प्रश्न किया -"आगरा की गलियों में कितने मोड़ हैं ?"

महेश दस बोले -"सिर्फ 2 मेरे बादशाह. बाएं और दाएं."

बादशाह अकबर जवाब सुनकर खुश हो गए और बोले -"आज से तुम मेरे नवरत्नों में से एक होगे. और तुम्हें महाराज बीरबल के नाम से जाना जायेगा."

यह सुनकर सभी महाराज बीरबल की जय बोलते हैं.

इस प्रकार आपने जाना की महेश दास ही बीरबल के नाम से मशहूर हुए.

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बीरबल कैसे बना नवरत्न I Akbar Birbal Story In Hindi बीरबल कैसे बना नवरत्न I Akbar Birbal Story In Hindi Reviewed by hindi stories on November 18, 2019 Rating: 5

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